Dussehra 2025: विजयदशमी कब है? तारीख, समय और महत्व जानें
दशहरा या विजयदशमी हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन मास की शुक्ल पक्ष दसमी तिथि को मनाया जाता है।
2025 में दशहरा 2 अक्टूबर, 2025 (गुरुवार) को है।
महत्वपूर्ण समय (मुहूर्त):
विजय मुहूर्त: 02:09 PM से 02:56 PM (लगभग 47 मिनट)
अपराह्न पूजा समय: 01:21 PM से 03:44 PM (लगभग 2 घंटे 22 मिनट)
दशमी तिथि प्रारंभ: 01 अक्टूबर, शाम 7:01 बजे से
दशमी तिथि समाप्त: 02 अक्टूबर, शाम 7:10 बजे तक
इस प्रकार, दशमी तिथि एवं मुहूर्त दोनों को ध्यान में रखते हुए पूजा–अर्चना करनी चाहिए।
ज्योतिषीय महत्व एवं Dr Vinay Bajrangi की दृष्टि
1. बुराई पर अच्छाई की जीत
Dussehra 2025 यह संदेश देता है कि अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई की विजय होती है। यह न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी एक परिवर्तनकारी समय है।
2. उपाय एवं मुहूर्त का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में कहा जाता है कि यदि पूजा एवं मंत्रोच्चारण सही मुहूर्त पर किया जाए, तो उसका प्रभाव अनेक गुना बढ़ जाता है। यह शुभ ग्रहयोग और नक्षत्र स्थिति से जुड़ा है।
3. Dr Vinay Bajrangi का विश्लेषण
Dr Vinay Bajrangi एक प्रसिद्ध वैदिक ज्योतिषी हैं, जिन्होंने दशहरा जैसे त्योहारों का गहरा ज्योतिषीय विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
उनके अनुसार:
विजयदशमी के दिन शामी पूजा, अपराजिता पूजा एवं सीमा अवलांगन (Seema Avalanghan) जैसे उपाय विशेष रूप से लाभदायक होते हैं।
दशमी तिथि की शुरुआत एवं अंत का समय ग्रह–नक्षत्रों के अनुसार देखा जाना चाहिए ताकि पूजा का प्रभाव अधिकतम हो।
वे यह सुझाव देते हैं कि केवल रीतिगत पूजा से काम नहीं चलेगा, कर्म सिद्धि, आत्मिक प्रयत्न और सच्ची भक्ति आवश्यक है।
Dr Bajrangi इस बात पर जोर देते हैं कि जब किसी व्यक्ति की जन्मपत्री (कुंडली), नवांश (D-9 चार्ट) और ग्रह दशा को मिलाकर देखा जाए, तब ही सही उपाय सुझाए जा सकते हैं।
दशहरा 2025: क्या करें, क्या न करें
शुभ दिशाएँ एवं उपाय
शमी (Vachellia / Prosopis) पत्तों का आदान–प्रदान करना – यह पारम्परिक रूप से विजय का प्रतीक माना जाता है।
दिन के समय रावण दहन समारोह देखना या आयोजन करना — बुराई का विनाश।
अपराजिता देवी की पूजा करना — शक्ति और अजेयता की देवी मंत्रों के साथ।
सीमा अवलांगन — प्रतीकात्मक सीमाओं को पार करना, नये आरंभों की ओर बढ़ना।
1. शुभ मुहूर्त में विशेष पूजा करना, ध्यान करना।
2. दान, सेवा और दूसरों की सहायता करना।
किन बातों से बचें
1. पूजा या योजना को संदेह या व्याकुलता की मानसिकता से करना
2. अनौपचारिक समय में पूजा करना, बिना मुहूर्त देखे
3. नकारात्मक विचार, द्वेष या अहंकार को मुखर करना
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1: विजयदशमी और दशहरा में क्या अंतर है?
उत्तर: दोनों ही एक ही त्योहार के रूप में उपयोग होते हैं। दशहरा शब्द भक्तिपरक नाम है, जबकि विजयदशमी इसका संस्कृत नाम है।
Q2: क्या हर क्षेत्र में पूजा समय (मुहूर्त) एक जैसा होगा?
उत्तर: नहीं। मुहूर्त क्षेत्र (स्थान), अक्षांश–देशांतर, ग्रह–नक्षत्र स्थिति आदि से प्रभावित होता है। इसलिए प्रत्येक क्षेत्र का पंचांग देखना आवश्यक है।
Q3: यदि विजय मुहूर्त छूट जाए तो क्या पूजा बेकार होती है?
उत्तर: नहीं। सही नकारात्मक नहीं कह सकते, लेकिन शुभ मुहूर्त में करने का प्रभाव अधिक माना जाता है। बाद में भी पूजा कर सकते हैं।
Q4: Dr Vinay Bajrangi से कैसे संपर्क करें?
उत्तर: Dr Vinay Bajrangi की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म हैं, जहाँ ज्योतिषी सेवा एवं मार्गदर्शन मिलता है।
Q5: दशहरा के बाद किस त्योहार की तैयारी शुरू होती है?
उत्तर: दशहरा के बाद दीपावली (Diwali) की तैयारी शुरू होती है — दीपों, पूजा सामग्री, सफाई आदि।
निष्कर्ष
Dussehra 2025 का यह पर्व 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा, और इसका विजय मुहूर्त 02:09 PM से 02:56 PM है। यह समय बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। Dr Vinay Bajrangi जैसे ज्योतिषी इस पर्व को न सिर्फ आध्यात्मिक रूप से, बल्कि ग्रह–नक्षत्र प्रभावों के दृष्टिकोण से भी देखते हैं।
इस विजयदशमी पर, शुभ मुहूर्त में निरंतर पूजा, सच्ची भक्ति, आत्मपरीक्षण और दान–उपकार को अपनाएँ। यदि आप चाहें तो मैं आपके जन्मपत्री अनुसार इस दशहरा के लिए विशेष उपाय और मुहूर्त भी बता सकता हूँ — क्या मैं आपके लिए ये कर दूँ?
Dr. Vinay Bajrangi: किसी भी विशिष्ट मुद्दे के लिए, मेरे कार्यालय @ +91 9999113366 से संपर्क करें। भगवान आपको एक खुशहाल जीवन आनंद प्रदान करें।
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