श्रावण माह करता है मांगलिक दोषों का नाश मिलता है दांपत्य जीवन का सुख

श्रावण माह करता है मांगलिक दोषों का नाश मिलता है दांपत्य जीवन का सुख

श्रावण माह के समय पर विवाह जैसे सुख की प्राप्ति के लिए किए जाने वाले अनुष्ठान बेहद ही उपयोगी माने गए हैं। सावन माह का समय शास्त्रों के अनुसार बेहद विशेष समय माना गया है क्योंकि इस माह के दौरान भगवान शिव का पूजन तो मुख्य होता ही है, साथ ही इस समय पर विवाह इत्यादि मांगलिक सुखों की प्राप्ति के लिए उत्तम होता है, क्योंकि इसी माह के दौरान जहां श्रावण सोमवार के व्रत किए जाते हैं, वहीं इस समय पर मंगला गौरी पूजन, तीज, हरियाली तीज एवं शिवरात्रि का समय होता है. इन सभी पर्वों का आगमन इस सावन माह में होता है और इन सभी व्रत एवं त्यौहारों का महत्व विवाह सुख एवं दांपत्य जीवन के सुख को प्रदान करने के लिए भी बेहद विशेष होते हैं


सावन सोमवार व्रत देते हैं मांगलिक सुख 


ह्रौं महाशिवाय वरदाय ह्रीं ऐं काम्य सिद्धि रुद्राय ह्रौं नमः:

 

सावन माह के दौरान आने वाले सोमवान सोमवार के व्रत का समय विवाह के सुख की प्राप्ति के लिए बहुत उत्तम माना गया है. शास्त्रों में मौजूद प्रमाण इस बात की पुष्टि करते हैं की सावन में रखे जाने वाले सोमवार के व्रत एवं इस दिन से सोमवार के व्रत का आरंभ करना भी उत्तम माना गया है. यदि आप सोमवार के व्रत की शुरुआत करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह समय विशेष है और इस दिन से सोमवार के व्रत सोलह सोमवार व्रतों का शुभारंभ किया जा सकता है. सोलह सोमवार व्रत को मनपसंद जीवन साथी की प्राप्ति के लिए किया जाता है



शिवपुराण, लिंग पुराण इत्यादि में सावन माह की विशेषता का वर्णन मिलता है


सावन माह का विवाह ज्योतिष में महत्व 


भं भवाय देव देवाय सर्व कार्य सिद्धिं देहि देहि कामेश्वराय भं नमः



विवाह ज्योतिष के अनुसार अपने जीवन में मनपसंद जीवन साथी की प्राप्ति के लिए और अपने शीघ्र विवाह के लिए सावन माह में आने वाले सावन सोमवार के दिन पूजा एवं व्रत करना बहुत महत्वपूर्ण उपाय होते हैं. इन ज्योतिषीय उपायों को करके व्यक्ति अपने लिए एक योग्य जीवन साथी की तलाश को पूरा कर सकता है. 16 सावन सोमवार कथा के अनुसार विवाह सुख एवं जीवन साथी की दीर्घायु का आशीर्वाद पाना संभव होता है



सावन माह को श्रावण माह के नाम से भी पुकारा जाता है जिसका महत्व शास्त्रों में विशेष रहा है यह वह समय है जब आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है तथा जीवन के सुखों की प्राप्ति का संभव होती है. इस समय को भगवान शिव एवं शक्ति के उपासक बहुत विशेष रुप से मनाते हैं पुराण अनुसार सावन का समय भगवान शिव को अत्यंत प्रिय रहा है. इस माह के दौरान श्रवण नक्षत्र का पूजन भी विशेष होता है, चंद्रमा, सूर्य, मंगल, शनि इत्यादि ग्रहों की शुभता के लिए भी इस माह की स्थिति अनुकूल मानी गई है



सावन माह पूजन से विवाह में देरी होती है दूर

 

विवाह में यदि बार बार होने वाली देरी के चलते कई तरह के तनाव एवं मानसिक चिंताएं व्यक्ति को परेशानी में डालने वाली होती हैं. ज्योतिष अनुसार विवाह में देरी के कई कारण हो सकते हैं. कुंडली में सप्तम भाव का कमजोर होना, पाप ग्रहों से प्रभावित होना इत्यादि स्थिति के चलते विवाह में किसी किसी कारण से देरी होती चली जाती है. ऎसे में कुंडली के इन योगों को शुभ करने एवं सप्तम भाव की स्थिति को शुभ बनाने हेतु सावन माह का समय काफी सहायक बनता है. सावन माह के समय विभिन्न प्रकार के पूजा, अनुष्ठान, मंत्र इत्यादि से कुंडली के खराब योग अनुकूल किए जा सकते हैं


शास्त्रों में वर्णित है की देवी सती ने भगवान शिव को पाने हेतु जब कठोर तप किया तब भगवान शिव ने उन्हें अपनी जीवन संगनी के रुप में स्वीकार किया और इसी कारन सावन में तीज जैसे पर्वों का महत्व विशेष होता है इस समय पर यदि विवाह में किसी भी तरह कि देरी को दूर कर पाना संभव माना गया है. इसलिए सावन माह के दौरान कई तरह के उपवास, मंत्र एवं शिव पार्वती पूजन को करने का विधान भी रहा है जो एक अच्छे सुखी वैवाहिक जीवन का आधार भी बनता है.

 

सावन माह: लव मैरिज की समस्या को करता है दूर 

 

भगवान शिव के साथ माता पार्वती का संबंध बनाता है प्रेम विवाह का आधार माना गया है. देवी सती ने जब पुन: जन्म लिया पार्वती रुप में तो उन्होंने भगवान शिव को अपना जीवन साथी पाने की इच्छा की पूर्ति के लिए वर्षों तक कठोर तप किया ऎसे में अपने शास्त्रों के अनुसार सावन माह के दौरान ही भगवान ने देवी पार्वती को अपने जीवन साथी के रुप में पाया था, इसी कारण इस माह के प्रत्येक दिन के साथ साथ कुछ विशेष तिथियों का समय विवाह के सुख को पाने के साथ साथ लव मैरिज के होने की संभावनाओं को बढ़ा देने वाला माना गया है


इस समय पर सावन के सोमवार का समय, सावन के मंगलवार का समय, सावन गुरुवार का समय, सावन की तृतीया तिथि का समय, एकादशी का समय, सावन प्रदोष का समय एवं सावन शिवरात्रि से लेकर सावन की पूर्णिमा का समय विशेष तिथियों का योग बनाता है. इन समय पर किए जाने वाले ज्योतिषीय उपाय भी कारगर सिद्ध होते हैं

 

कुंडली में मंगल दोष, विवाह में देरी या दांपत्य जीवन से संबंधित कोई भी परेशानी है तो सावन माह के दौरान इन सभी चिंताओं से मुक्ति पाना संभव है. श्रावण माह में ज्योतिष परामर्श और उचित उपायों द्वारा लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं

 

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