delay marriage Archives - KundliHindi https://kundlihindi.com/tag/delay-marriage/ My WordPress Blog Mon, 11 May 2026 09:48:45 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://i0.wp.com/kundlihindi.com/wp-content/uploads/2022/11/cropped-kundlihindi.png?fit=32%2C32&ssl=1 delay marriage Archives - KundliHindi https://kundlihindi.com/tag/delay-marriage/ 32 32 214685846 मांगलिक दोष कैलकुलेटर: जन्म विवरण से तुरंत जांचें मांगलिक स्थिति https://kundlihindi.com/blog/mangalik-dosh-calculator-hindi/ https://kundlihindi.com/blog/mangalik-dosh-calculator-hindi/#respond Sat, 13 Dec 2025 06:31:23 +0000 https://kundlihindi.com/?p=4349 भारतीय संस्कृति में विवाह से जुड़े निर्णयों में ज्योतिष की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, और मांगलिक दोष आज भी कुंडली मिलान का एक प्रमुख विषय माना जाता है। विवाह की योजना बना रहे व्यक्ति हों या पारिवारिक स्तर पर संगतता का मूल्यांकन किया जा रहा हो—मांगलिक स्थिति की समय रहते जानकारी कई भ्रम और आशंकाओं...

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भारतीय संस्कृति में विवाह से जुड़े निर्णयों में ज्योतिष की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, और मांगलिक दोष आज भी कुंडली मिलान का एक प्रमुख विषय माना जाता है। विवाह की योजना बना रहे व्यक्ति हों या पारिवारिक स्तर पर संगतता का मूल्यांकन किया जा रहा होमांगलिक स्थिति की समय रहते जानकारी कई भ्रम और आशंकाओं को दूर कर सकती है।

आज के समय में तेज़ और भरोसेमंद ज्योतिषीय जानकारी की आवश्यकता बढ़ने के साथ, ऑनलाइन मांगलिक दोष कैलकुलेटर का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है। एक सही ढंग से तैयार किया गया मांगलिक दोष कैलकुलेटर वैदिक नियमों के आधार पर कुंडली विश्लेषण को सरल बनाता है, साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि किन स्थितियों में विशेषज्ञ परामर्श आवश्यक है।

मांगलिक दोष क्या है?

मांगलिक दोष वैदिक ज्योतिष की एक विशेष स्थिति है, जो जन्म कुंडली में मंगल ग्रह (मंगल) की स्थिति के कारण बनती है।

मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस, क्रियाशीलता और आक्रामकता का प्रतिनिधित्व करता है। जब यह विवाह से संबंधित भावों में असंतुलित स्थिति में होता है, तो वैवाहिक जीवन में तनाव, मतभेद या विलंब का कारण बन सकता है।

मंगल की स्थिति से मांगलिक दोष कैसे बनता है

यदि मंगल निम्न भावों में स्थित हो, तो मांगलिक दोष माना जाता है:

  • पहला भाव (लग्न)
  • दूसरा भाव
  • चौथा भाव
  • सातवां भाव
  • आठवां भाव
  • बारहवां भाव

ये भाव विवाह, पारिवारिक स्थिरता और साझेदारी से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं।

मांगलिक दोष से जुड़ी सामान्य भ्रांतियाँ

  • हर मांगलिक व्यक्ति का वैवाहिक जीवन खराब नहीं होता
  • मांगलिक दोष विवाह को स्वतः असफल नहीं बनाता
  • इसका प्रभाव कुंडली की समग्र स्थिति पर निर्भर करता है

विवाह से पहले मांगलिक दोष जांचना क्यों आवश्यक है

विवाह ज्योतिष और विवाह भविष्यवाणी में मांगलिक दोष का विशेष महत्व इसलिए होता है क्योंकि यह संगतता और वैवाहिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

यदि मांगलिक दोष को नज़रअंदाज़ किया जाए, तो यह निम्न समस्याओं से जुड़ सकता है:

  • बारबार विवाद
  • भावनात्मक असंतुलन
  • विवाह में अनावश्यक विलंब
  • दांपत्य तनाव

कुंडली मिलान के समय मांगलिक दोष की संगतता देखने से गलतफहमियों से बचा जा सकता है और वास्तविक स्थिति को समझा जा सकता है।

आधुनिक दृष्टिकोण से व्यावहारिक मूल्यांकन

आधुनिक विवाह ज्योतिष में अब मांगलिक दोष को अकेले नहीं देखा जाता। अनुभवी ज्योतिषी इसे भावनात्मक संगतता, ग्रहों की शक्ति और दशापरिवर्तन के साथ जोड़कर देखते हैं। मंगल का प्रभाव राशि, स्वामित्व और शुभ ग्रहों की दृष्टि के अनुसार बदलता है, इसलिए सतही निष्कर्ष सही नहीं माने जाते।

आज कई लोग प्रारंभिक स्पष्टता के लिए ऑनलाइन मांगलिक दोष कैलकुलेटर का उपयोग करते हैं। यह गलत जानकारी से उत्पन्न भय को कम करता है और परिवारों को तथ्यात्मक आधार पर निर्णय लेने में सहायता करता है। सही उपयोग में यह कैलकुलेटर केवल प्रारंभिक जांच का माध्यम होता है, अंतिम निर्णय नहीं।

विवाह भविष्यवाणी केवल मंगल पर आधारित नहीं होती। शुक्र, चंद्रमा और सप्तम भाव का स्वामी भी वैवाहिक जीवन में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। फ्री मांगलिक दोष कैलकुलेटर दिशा दिखाता है, लेकिन पूर्ण कुंडली मिलान दीर्घकालिक स्पष्टता देता है।

यह मांगलिक दोष कैलकुलेटर कैसे काम करता है

ऑनलाइन मांगलिक दोष कैलकुलेटर वैदिक ज्योतिष के नियमों के अनुसार ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण करता है।

आवश्यक जन्म विवरण

  • जन्म तिथि
  • जन्म समय
  • जन्म स्थान

किस आधार पर विश्लेषण किया जाता है

  • लग्न और भाव संरचना
  • मंगल की सटीक स्थिति
  • राशि की शक्ति
  • विवाह से जुड़े भावों का संबंध

सटीकता बनाए रखने के लिए इसमें शास्त्रीय नियमों का उपयोग किया जाता है, कि सामान्य सॉफ्टवेयर गणनाओं का।

मांगलिक दोष बनने की स्थितियाँ

मांगलिक दोष केवलहै या नहींतक सीमित नहीं होता, इसके स्तर भी होते हैं।

मुख्य स्थितियाँ

जब मंगल स्थित हो:

  • 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में

विशेष स्थितियाँ जहाँ दोष लागू नहीं होता

  • मंगल अपने ही राशि में हो
  • मंगल मकर राशि में उच्च का हो
  • शुभ ग्रहों की मजबूत दृष्टि हो

आंशिक और पूर्ण मांगलिक दोष

  • आंशिक मांगलिक दोष: प्रभाव हल्का होता है
  • पूर्ण मांगलिक दोष: गहन मूल्यांकन आवश्यक होता है

मांगलिक दोष के प्रकार

मृदु (हल्का) मांगलिक दोष

  • सीमित प्रभाव
  • सही मिलान से संतुलन संभव

प्रबल मांगलिक दोष

  • सावधानीपूर्वक कुंडली मिलान आवश्यक
  • समय और ग्रह बल महत्वपूर्ण

अस्थायी मांगलिक दोष

  • विशेष दशाओं के कारण
  • समय के साथ प्रभाव कम हो सकता है

मांगलिक दोष निवारण और निरस्तीकरण नियम

वैदिक ज्योतिष में मांगलिक दोष के निरस्तीकरण के स्पष्ट नियम हैं।

राशि आधारित अपवाद

  • मेष या वृश्चिक में मंगल
  • मकर में उच्च का मंगल

शुभ ग्रहों की भूमिका

  • गुरु की दृष्टि से आक्रामकता कम होती है
  • शुक्र वैवाहिक संतुलन प्रदान करता है

मैन्युअल जांच क्यों आवश्यक है

ऑनलाइन मांगलिक दोष कैलकुलेटर निम्न पहलुओं का पूर्ण आकलन नहीं कर पाता:

  • ग्रह दृष्टि
  • दशा प्रभाव
  • संपूर्ण विवाह योग

मांगलिक दोष कैलकुलेटर के परिणाम कैसे समझें

मांगलिक

मंगल का प्रभाव मौजूद है, स्तर की जांच आवश्यक है।

नॉनमांगलिक

मंगल वैवाहिक असंतुलन नहीं बना रहा।

गंभीरता स्तर

  • हल्का
  • मध्यम
  • प्रबल

मध्यम या प्रबल स्थिति में विशेषज्ञ परामर्श उचित रहता है।

ऑनलाइन मांगलिक दोष कैलकुलेटर की सीमाएँ

  • केवल मंगल से विवाह तय नहीं होता
  • भावनात्मक संगतता चंद्रमा से जुड़ी होती है
  • विवाह का समय भी परिणामों को प्रभावित करता है

इसलिए फ्री मांगलिक दोष कैलकुलेटर को प्रारंभिक उपकरण के रूप में ही उपयोग करना चाहिए।

मांगलिक दोष कैलकुलेटर बनाम मैन्युअल कुंडली विश्लेषण

कैलकुलेटर कब उपयोगी है

  • त्वरित जानकारी
  • प्रारंभिक जांच
  • आसान उपलब्धता

मैन्युअल विश्लेषण कब आवश्यक है

  • विवाह का अंतिम निर्णय
  • जटिल कुंडलियाँ
  • व्यक्तिगत मार्गदर्शन

दोनों एकदूसरे के पूरक हैं, विकल्प नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (People Also Ask)

क्या विवाह के बाद मांगलिक दोष हट जाता है?
नहीं, लेकिन समय और दशा परिवर्तन से इसका प्रभाव कम हो सकता है।

क्या सभी मांगलिक लोगों को वैवाहिक समस्या होती है?
नहीं, सही मिलान से कई मांगलिक विवाह सफल होते हैं।

क्या पुरुष और महिला के लिए मांगलिक दोष समान है?
हाँ, मंगल दोनों पर समान प्रभाव डालता है।

क्या दो मांगलिक विवाह कर सकते हैं?
हाँ, मांगलिकमांगलिक मिलान संतुलन प्रदान करता है।

क्या आज भी मांगलिक दोष प्रासंगिक है?
हाँ, यदि इसे तर्कसंगत और पूर्ण विवाह ज्योतिष के साथ देखा जाए।

विनय बजरंगी का मांगलिक दोष कैलकुलेटर क्यों उपयोग करें?

विनय बजरंगी का मांगलिक दोष कैलकुलेटर शुद्ध वैदिक ज्योतिष नियमों पर आधारित है, जैसा कि पेशेवर परामर्श में उपयोग किया जाता है।

इसकी विश्वसनीयता

  • नियमआधारित गणना
  • स्पष्ट और निष्पक्ष परिणाम
  • व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव पर आधारित

मुख्य लाभ

  • तेज़ और सरल उपयोग
  • स्पष्ट मांगलिक / नॉनमांगलिक परिणाम
  • विवाह ज्योतिष परामर्श से पहले आदर्श प्रारंभिक कदम

यदि आप भ्रम के बिना स्पष्टता चाहते हैं, तो यह ऑनलाइन मांगलिक दोष कैलकुलेटर एक भरोसेमंद शुरुआत प्रदान करता हैजिसे आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ पुष्टि से समर्थित किया जा सकता है।

किसी भी विशिष्ट मुद्दे के लिएमेरे कार्यालय @ +91 9999113366 से संपर्क करें। भगवान आपको एक खुशहाल जीवन आनंद प्रदान करें।

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शादी में आने वाली रुकावट दूर करने के लिए करें ये ज्योतिषीय उपाय https://kundlihindi.com/blog/vivah-me-aa-rhi-rukawat-ke-upay/ https://kundlihindi.com/blog/vivah-me-aa-rhi-rukawat-ke-upay/#respond Fri, 06 Jun 2025 05:41:55 +0000 https://kundlihindi.com/?p=3660 शादी हर व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। लेकिन कई बार लाख कोशिशों के बावजूद शादी में रुकावट आ जाती है। कभी सही रिश्ता नहीं मिलता, तो कभी सगाई के बाद बात टूट जाती है। ऐसे में जरूरी है कि हम ज्योतिषीय उपाय अपनाकर इन बाधाओं को दूर करें। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली में कुछ ग्रह दोष...

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शादी हर व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। लेकिन कई बार लाख कोशिशों के बावजूद शादी में रुकावट  जाती है। कभी सही रिश्ता नहीं मिलता, तो कभी सगाई के बाद बात टूट जाती है ऐसे में जरूरी है कि हम ज्योतिषीय उपाय अपनाकर इन बाधाओं को दूर करें।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली में कुछ ग्रह दोष होते हैं जो विवाह में देरी या रुकावट का कारण बनते हैं। लेकिन इनका समाधान संभव है। आज हम जानेंगे ऐसे ही कुछ असरदार उपाय, जिन्हें अपनाकर आप अपने विवाह मार्ग को सुगम बना सकते हैं।

शादी में रुकावट के ज्योतिषीय कारण

1.    मांगलिक दोष (Mangal Dosh) – अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित हो तो वह मांगलिक दोष कहलाता है। इससे शादी में देरी या रिश्तों में समस्याएं आती हैं।

2.    शनि का प्रभाव – यदि शनि ग्रह सप्तम भाव पर प्रभाव डाल रहा हो, तो वह व्यक्ति के विवाह में रुकावट पैदा करता है।

3.    गुरु और शुक्र की स्थिति – विवाह में गुरु (बृहस्पति) और शुक्र का सीधा संबंध होता है। इनका नीचस्थ या पीड़ित होना विवाह में रुकावट का कारण बनता है।

4.    दशा और गोचर – कई बार सही ग्रह दशा नहीं चल रही होती, जिससे विवाह के योग होते हुए भी बात नहीं बनती।

शादी में रुकावट दूर करने के ज्योतिषीय उपाय

1. मंगल दोष निवारण के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें

अगर आपकी कुंडली में मांगलिक दोष है, तो मंगलवार को हनुमान चालीसा का 11 बार पाठ करें। साथ ही बजरंग बली को लाल चोला चढ़ाएं।

2. सप्तम भाव की शुद्धि के लिए रुद्राभिषेक करें

शिव जी को वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है। इसलिए सोमवार को शिवलिंग पर कच्चे दूध, शहद और बेलपत्र चढ़ाकर रुद्राभिषेक करें।

3. गुरु का आशीर्वाद पाने के लिए गुरुवार का व्रत रखें

गुरु ग्रह को प्रसन्न करने के लिए गुरुवार का व्रत रखें। पीले वस्त्र पहनें, चने की दाल का दान करें और केले के पेड़ की पूजा करें।

4. शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा करें

शुक्र ग्रह को विवाह का कारक माना जाता है। शुक्रवार को सफेद वस्त्र पहनकर माता लक्ष्मी की पूजा करें चावल, दूध और सफेद मिठाई का दान करें।

5. कुंडली मिलान कराएं

शादी से पहले कुंडली मिलान अवश्य कराएं। इससे यह पता चलता है कि कौनसे दोष हैं और उनसे बचने के क्या उपाय हैं।

6. Dr. Vinay Bajrangi से परामर्श लें

यदि उपरोक्त उपायों के बाद भी शादी में रुकावट रही है, तो कुंडली की गहन जांच जरूरी है। इसके लिए आप प्रख्यात ज्योतिषाचार्य Dr. Vinay Bajrangi से संपर्क कर सकते हैं। उनका अनुभव और विश्लेषण आपको सही दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

ऐसे संकेत जो बताते हैं कि आपकी कुंडली में विवाह में रुकावट है

·  लगातार रिश्ते टूटते हैं

·  मातापिता को रिश्ता मंजूर नहीं होता

·  मनचाहा जीवनसाथी नहीं मिलता

·  शादी तय होतेहोते टल जाती है

·  कुंडली मिलान में दोष निकलता है

FAQ – शादी में रुकावट और ज्योतिषीय समाधान

प्र.1: क्या हर मांगलिक दोष शादी में रुकावट पैदा करता है?
उत्तर: नहीं, हर मांगलिक दोष प्रभावी नहीं होता। यह कुंडली के अन्य ग्रहों और भावों पर भी निर्भर करता है। इसके लिए विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

प्र.2: शादी में देरी का उपाय क्या है?
उत्तर: गुरुवार का व्रतशिव पूजामाता लक्ष्मी की आराधना आदि उपाय करें। साथ ही कुंडली अनुसार विशेष ग्रह शांति कराएं।

प्र.3: क्या केवल रत्न पहनने से शादी में रुकावट दूर हो जाती है?
उत्तर: नहीं, रत्न तभी पहनने चाहिए जब वे कुंडली के अनुसार हों। बिना सलाह के रत्न पहनना उल्टा असर भी दे सकता है।

प्र.4: शादी के लिए कौनसे ग्रह सबसे महत्वपूर्ण होते हैं?
उत्तर: मुख्यतः गुरु (बृहस्पति)शुक्रशनि, और चंद्रमा इनकी स्थिति शादी के योग तय करती है।

प्र.5: Dr. Vinay Bajrangi की विशेषता क्या है?
उत्तर: Dr. Vinay Bajrangi एक अनुभवी वैदिक ज्योतिषाचार्य हैं, जो कुंडली के गहराई से विश्लेषण द्वारा विवाह संबंधित समस्याओं का समाधान प्रदान करते हैं।

निष्कर्ष

शादी में रुकावट एक आम समस्या है, लेकिन इसका समाधान संभव है। यदि आप वैदिक ज्योतिष के उपायों को सही ढंग से अपनाएं और कुंडली अनुसार निर्णय लें, तो विवाह जीवन में निश्चित ही शुभता आती है। Dr. Vinay Bajrangi जैसे अनुभवी ज्योतिषी से मार्गदर्शन लेकर आप अपने विवाह जीवन को सफल बना सकते हैं।

अगर आप चाहते हैं कि आपकी कुंडली का विश्लेषण करके सही विवाह मुहूर्त निकाला जाए या विवाह बाधा का समाधान मिले, तो विशेषज्ञ की मदद लेने में देर करें।

शादी में रुकावट के ज्योतिष उपायमांगलिक दोष निवारणकुंडली मिलान, और शुभ विवाह योग जैसे शब्दों को समझना और उनके अनुसार उपाय करना आपको सही जीवनसाथी पाने में सहायता करेगा।

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कुंडली में प्रेम विवाह की पहचान कैसे करें? https://kundlihindi.com/blog/janam-kundli-mein-love-marriage-yoga/ https://kundlihindi.com/blog/janam-kundli-mein-love-marriage-yoga/#respond Thu, 02 Jan 2025 09:52:59 +0000 https://kundlihindi.com/?p=3277 विवाह और ज्योतिष शास्त्र का महत्त्वज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली के माध्यम से किसी व्यक्ति के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को जाना जा सकता है। इनमें विवाह एक प्रमुख भूमिका निभाता है। विशेष रूप से, अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपकी जन्म कुंडली में लव मैरिज का योग है या नहीं तो इसके...

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विवाह और ज्योतिष शास्त्र का महत्त्वज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली के माध्यम से किसी व्यक्ति के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को जाना जा सकता है। इनमें विवाह एक प्रमुख भूमिका निभाता है। विशेष रूप से, अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपकी जन्म कुंडली में लव मैरिज का योग है या नहीं तो इसके लिए कुछ विशिष्ट योगों और ग्रहों की स्थिति को देखा जाता है। आइए, विस्तार से समझते हैं।

लव मैरिज के योग जन्मकुंडली में पंचम और सप्तम भाव का संबंध:

पंचम भाव प्रेम और रोमांस का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि सप्तम भाव विवाह का। यदि इन दोनों भावों के स्वामी आपस में संबंध रखते हैं या एक ही ग्रह से प्रभावित होते हैं, तो यह जन्मकुंडली में लव मैरिज का संकेत हो सकता है।

शुक्र और चंद्रमा का प्रभाव:

शुक्र प्रेम और आकर्षण का कारक ग्रह है, और चंद्रमा भावनाओं का प्रतीक है। जब ये दोनों ग्रह मजबूत और शुभ स्थिति में हों और विशेष रूप से पंचम और सप्तम भाव में हों, तो यह लव मैरिज का योग बन सकता है।

राहु और मंगल का प्रभाव:

राहु स्वतंत्र विचारों और परंपराओं को तोड़ने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। यदि राहु पंचम भाव में हो या सप्तम भाव पर इसका प्रभाव हो, तो जातक प्रेम विवाह के प्रति आकर्षित हो सकता है। मंगल भी यदि पंचम या सप्तम भाव में हो, तो यह प्रेम विवाह में साहस और दृढ़ता प्रदान करता है। हालांकि, मंगल दोष की स्थिति में विवाह में बाधाएं सकती हैं।

मंगल दोष और विवाह में बाधा के उपाय

यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष है, तो यह विवाह में देरी या समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। ऐसे में निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

1. हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें।

2. मंगलवार के दिन व्रत रखें और मंगल ग्रह के लिए दान करें।

3. वैवाहिक जीवन को सुखद बनाने के लिएमंगल शांति पूजाकराएं।

4. विवाह से पहले कुंडली मिलान करवाकर दोषों को संतुलित करें।

उपाय विवाह में देरी होने पर

1.  यदि आपकी जन्म कुंडली में विवाह में देरी हो रहा है, तो ये उपाय लाभकारी हो सकते हैं:

  1. हर शुक्रवार मां दुर्गा की पूजा करें और कन्याओं को मिठाई वितरित करें।
  2. विष्णु और लक्ष्मी की संयुक्त आराधना करें।
  3. नवरात्रि के समय बेटी की शादी के उपाय जैसे कन्या पूजन और उपवास रखें।
  4. कुंडली में दोषों के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श लें।
  5. लव मैरिज का योग मजबूत करने के उपाय
  6. शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए शुक्र मंत्रळोकाए शुक्राय नम:” का नियमित जाप करें।
  7. गले में चांदी का लॉकेट पहनें।
  8. मंगलवार और शनिवार को गरीबों को लाल वस्त्र दान करें।
  9. रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए सच्चाई और ईमानदारी से प्रेम करें।

निष्कर्ष

प्रेम विवाह होगा या नहीं; यह विवरण ज्योतिष शास्त्र और जन्म कुंडली के माध्यम से होगा। यह कुंडली में आंकड़े और भावों की संबंधित ग्रहों के माध्यम से है। आप तब समझ पाएंगे कि आपका विवाह प्रेम संबंध से होगा या पारंपरिक रूप से। अगर विवाह में किसी भी बाधाएं या विलंब का स्पंदन कुंडली में दिखाई देगा, तो उचित उपाय आंड पूजा कर के इन्हें दूर किया जा सकता है। इसलिए, सही मार्गदर्शन के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

किसी भी विशिष्ट मुद्दे के लिए, मेरे कार्यालय @ +91 9999113366 से संपर्क करें। भगवान आपको एक खुशहाल जीवन आनंद प्रदान करें।

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क्या आगे देवउठनी एकादशी आपके विवाह योग को बनाएं? https://kundlihindi.com/blog/marriage-yoga/ https://kundlihindi.com/blog/marriage-yoga/#respond Sat, 09 Nov 2024 07:27:54 +0000 https://kundlihindi.com/?p=3163 देव उठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन को भगवान विष्णु के चार महीने के शयनकाल के समाप्त होने का संकेत माना जाता है। इसके बाद सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है, खासकर विवाह से जुड़े कार्यों की। ऐसे में यह सवाल उठता...

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देव उठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन को भगवान विष्णु के चार महीने के शयनकाल के समाप्त होने का संकेत माना जाता है। इसके बाद सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है, खासकर विवाह से जुड़े कार्यों की। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या देव उठनी एकादशी आपके विवाह योग को सशक्त बना सकती है? जो लोग विवाह में देरी का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि यह दिन आपके विवाह योग को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है।

देव उठनी एकादशी का महत्व

देव उठनी एकादशी का महत्व पौराणिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक है। इस दिन को भगवान विष्णु के जागरण का पर्व माना जाता है, जिसके बाद धार्मिक अनुष्ठान, विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो विवाह में देरी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। देव उठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से कुंडली में विवाह से संबंधित दोषों को कम किया जा सकता है और विवाह योग को बल मिलता है।

कुंडली में विवाह योग कैसे बनता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की कुंडली में विवाह योग बनने के लिए कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं। कुंडली के सातवें भाव, शुक्र ग्रह, गुरु ग्रह और दारकारमाण (दारा कारक) ग्रह का स्थान और उनके संबंध विवाह योग को प्रभावित करते हैं। यदि किसी की कुंडली में कुछ दोष होते हैं, तो उस व्यक्ति के विवाह में देरी हो सकती है। देव उठनी एकादशी पर व्रत और पूजा करना कुंडली में इन दोषों को शांत कर सकता है और विवाह योग को सशक्त बना सकता है।

देव उठनी एकादशी पर विवाह योग को सशक्त करने के उपाय

देव उठनी एकादशी के दिन किए गए कुछ विशेष उपाय आपके विवाह योग को सशक्त बनाने में सहायक हो सकते हैं। यहां कुछ आसान उपाय दिए गए हैं:

1.    भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा: इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष लाभ होता है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और पीले फूल चढ़ाएं।

2.    व्रत और अनुष्ठान: इस दिन व्रत करने और विष्णु मंत्रों का जाप करने से कुंडली में विवाह से संबंधित दोषों का शमन होता है।

3.    दान और सेवा: गरीबों को दान देने से भी कुंडली के दोषों का प्रभाव कम होता है और विवाह योग मजबूत होता है। इस दिन अन्न, वस्त्र और धन का दान करने का विशेष महत्व है।

4.    मंत्र जाप: विवाह के योग को सशक्त बनाने के लिए इस दिन विशेष मंत्रों का जाप करना चाहिए, जैसे लक्ष्मीनारायणाय नमःका जाप। इससे कुंडली के दोषों में कमी आती है।

क्या इस एकादशी पर विवाह निश्चित हो सकता है?

ज्योतिष में मान्यता है कि देव उठनी एकादशी पर किए गए उपाय और पूजा विवाह के लिए शुभ फल प्रदान कर सकते हैं। इस दिन का व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा से कुंडली के दोष शांत हो सकते हैं, जिससे विवाह में आने वाली अड़चनों को दूर किया जा सकता है। हालांकि, सटीक परिणाम के लिए जन्म कुंडली का विश्लेषण आवश्यक है। इसलिए, कुंडली का अध्ययन करके व्यक्ति के विवाह योग को समझना और आवश्यक उपाय करना बेहतर होता है।

निष्कर्ष

देव उठनी एकादशी का पर्व विवाह योग के लिए अत्यंत शुभ अवसर माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से विवाह में रही देरी और अड़चनें दूर हो सकती हैं। अगर आप विवाह के लिए शुभ समय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो इस देवउठनी एकादशी का लाभ उठाएं। उचित उपाय और पूजा के माध्यम से विवाह योग को सशक्त बनाएं और अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करें। विवाह में देरी के लिए ज्योतिष परामर्श |

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कुंडली से कैसे जानें, किस उम्र में होगी आपकी शादी और कैसा होगा जीवनसाथी? https://kundlihindi.com/blog/kaise-jane-kab-hogi-shadi/ https://kundlihindi.com/blog/kaise-jane-kab-hogi-shadi/#respond Sat, 28 Sep 2024 04:59:33 +0000 https://kundlihindi.com/?p=3086 शादी कब होगी इस प्रश्न का उत्तर ज्योतिष की सहायता से आसानी से जाना जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र अनुसार व्यक्ति के जीवन में होने वाली प्रत्येक घटना का संबंध ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव एवं कर्मों की अवधारणा द्वारा ही संभव होती है। शादी विवाह से जुड़े प्रश्नों को जन्म कुंडली अनुसार समझा जा सकता...

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शादी कब होगी इस प्रश्न का उत्तर ज्योतिष की सहायता से आसानी से जाना जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र अनुसार व्यक्ति के जीवन में होने वाली प्रत्येक घटना का संबंध ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव एवं कर्मों की अवधारणा द्वारा ही संभव होती है। शादी विवाह से जुड़े प्रश्नों को जन्म कुंडली अनुसार समझा जा सकता है जिसमें कुंडली के कुछ विशेष भावग्रह अपनी अग्रीण भूमिका में होते हैं। किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सातवां भाव व्यक्ति के वैवाहिक जीवन से संबंधित सुखों को बताता है। कुंडली में विवाह संबंधित भाव ग्रहों का विश्लेषण करके, ग्रह एवं दशा गोचर की स्थिति को देख कर शादी की उम्र के बारे में तो जान सकते ही हैं और साथ ही आपका जीवन साथी कैसे गुणों वाला होगा इन बातों को भी आसानी से जाना जा सकता है।

 और इस भाव को दारा भाव भी कहा जाता है अर्थात जीवनसाथी का भाव और इस भाव की शुभता अशुभता का प्रभाव विवाह के बारे में जानकारी देने वाला होता है। कुछ विद्वान शादी के बारे में जानकारी के लिए सातवें भाव का विश्लेषण करते हैं जो उचित है लेकिन इस भाव को ही निर्णय के लिए मुख्य मान लेना उचित नहीं होगा। विवाह के लिए सातवां भाव, पंचम भाव, दूसरा भाव, आठवां भाव, बारहवां भाव वर्ग कुंडलियों में नवमांश कुंडली, सप्तमांश कुंडली, षष्टियांश कुण्डली इत्यादि पर भी विचार करने की आवश्यकता होती है।

लग्न कुंडली के अलावा भी अन्य कुंडलियों का विश्लेषण करते हुए शादी के समय की भविष्यवाणी करना संभव होता है। शादी से संबंधित हर प्रकार का प्रश्न कि शादी में देर क्यों हो रही है, शादी कब होगी, शादी में सुख कैसा रहेगा, शादी के पश्चात संतान सुख कैसा होगा, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में शादी कैसे आपको प्रभावित कर सकती है इस तरह के तमाम प्रश्नों के उत्तर ज्योतिषीय परामर्श द्वारा जाना जा सकता है।

कुंडली से कैसे जानें देर से शादी होने के कारण?

शादी में देरी के कई कारण हो सकते हैं जो ऊपरी रूप में तो हमें दिखाई देते हैं लेकिन उनका भीतरी पक्ष हम देख नहीं पाते हैं। जैसे कि कई बार नौकरीकरियर में अच्छे से स्थापित होने के बाद शादी करने का विचार देरी बना जाता है, रिश्ते का बार बार टूट जाना,  या फिर पसंद के अनुसार रिश्ता नहीं मिल पाना देरी बनाता चला जाता है या फिर इस तरह के तमाम उदाहरण देखने को मिल सकते हैं जिसके कारण विवाह में देरी होने लगती है। यह ऊपरी बातें तो दिखाई देती हैं लेकिन जब बात आती है इसके भीतर झांकने की तो इसका उत्तर हमें ज्योतिष में मिलता है क्योंकि  कई बार कुंडली में ऎसे योग बन रहे होते हैं जो शादी में देरी का कारण बन रहे होते हैं।

कुंडली में बनने वाले अशुभ योग, विवाह विलंब योग, मांगलिक योग, लग्न कुंडली में ग्रह अनुकूल लेकिन नवांश कुंडली में बलहीन, विवाह से संबंधित भावों की निर्बलता, पाप ग्रहों का प्रभाव इत्यादि बातें वो सूक्ष्म नजरिया है ज्योतिष का जो हमें बताता है की आखिर किन कारणों से हमारे विवाह में देरी/Late Marriage हो रही है।  

देर से शादी होने के कारण में लग्न कुंडली में सप्तम भाव की निर्बलता देरी बनाती है
कुंडली में सप्तम भाव और सप्तम भाव के स्वामी का अष्टम भाव से संबंध दूसरे भाव से संबंध अथवा बारहवें भाव से संबंध विवाह में देरी का संकेत देता है।

कुंडली में शादी के कारक ग्रह बृहस्पति और शुक्र का कमजोर या पाप प्रभाव में होना
विवाह भाव पर शनि जैसे पाप ग्रह का असर होना विवाह में विलंब का कारण बन सकता है।

नवांश कुंडली में सप्तम भाव और सप्तमेश का अष्टम भाव से संबंध अथवा पाप ग्रहों से प्रभावित होना। यह कुछ सामान्य बातें हैं जो शादी में होने वाली देरी को दिखाती हैं।

कैसे पता करें कि आपकी शादी किस उम्र में होगी और कब होगी?

जन्म कुंडली में मौजूद ग्रहों की स्थिति के द्वारा शादी की उम्र के बारे में जाना जा सकता है। इसके साथ साथ शादी की तिथि माह इत्यादि के बारे में भी जान पाना संभव होता है। एक सामान्य सिद्धांत के अनुसार लग्न और सप्तम भाव की ओर जब ग्रहों का जमावड़ा गोचर समय लग रहा होता है तो यह समय विवाह होने की संभावनाओं के लिए अनुकूल माना जाता है। ग्रहों के गोचर की स्थिति सप्तम भाव अथवा लग्न के पास या भाव पर ही बन रही होती है तो इससे संबंधित भाव घटनाएं घटित होती हैं।

शादी किस उम्र में होगी इसके लिए जरुरी है की लग्न कुंडली के सातवें भाव और सातवें भाव के स्वामी की स्थिति को देख कर इस बारे में जान सकते हैं। अगर सातवें भाव में गुरु शुभ रूप से दृष्टि दे रहा हो तो ऐसी स्थिति में विवाह जल्द होने की संभावनाएं होती हैं 21 वर्ष से 25 वर्ष के भीतर व्यक्ति का विवाह हो जाता है लेकिन ध्यान रखें की सप्तम भाव और उसका स्वामी भी अनुकूल स्थिति में हो और कोई पाप प्रभाव उसे पीड़ा दे रहा हो। सातवें भाव में शुक्र, चंद्र और बुध का होना विवाह को कम उम्र में देने वाली स्थिति को बनाता है।

कुंडली अगर सप्तमेश निर्बल हो, शनि की दृष्टि या स्थिति का प्रभाव हो। कोई अशुभ योग सातवें भाव में बन रहा है। मांगलिक योग प्रबल रूप से बना हो तब इस स्थिति के कारण विवाह तीस वर्ष के बाद की स्थिति का कारण बनता है। शादी में विलंब का योग बनता है।

मेरी जन्म कुंडली भावी जीवन साथी के बारे में क्या बताती है

आपकी जन्म कुंडली आपके जीवन साथी के बारे में सभी बातों की जानकारी देती है। आप कुंडली की मदद से जान सकते हैं कि आप का जीवन साथी कैसा होगा, उसकी पसंद नापसंद, आपके साथ उसके संबंध कैसे रहेंगे।आप दोनों अपने वैवाहिक जीवन का आनंद कैसे ले पाएंगे, आपके जीवन साथी का व्यवहार उसके गुण दोष सभी कुछ जन्म कुंडली विश्लेषण से जान पाना संभव है। लेकिन इन सभी बातों और भावी जीवन साथी की जानकारी आपको तभी हो सकती है जब आप सही ज्योतिषीय परामर्श लेते हैं। 

किसी भी विशिष्ट मुद्दे के लिए, मेरे कार्यालय @ +91 9999113366 से संपर्क करें। भगवान आपको एक खुशहाल वैवाहिक आनंद प्रदान करें।

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जानिए कुंडली द्वारा कब होगी आपकी शादी, क्यों हो रही है देरी और कारण https://kundlihindi.com/blog/kundli-dwara-jane-shadi-kab-hogi/ https://kundlihindi.com/blog/kundli-dwara-jane-shadi-kab-hogi/#respond Wed, 17 Jul 2024 06:45:31 +0000 https://kundlihindi.com/?p=2681 शादी विवाह जीवन का वह पड़ाव है जहां से जीवन का अलग ही रंग दिखाई देने लगता है. शादी विवाह को लेकर हम सभी लोग काफी भागदौड़ भी करते हैं एक अच्छे रिश्ते की तलाश सभी को रहती है. ऎसे में विवाह ज्योतिष इस में हमारी बहुत मदद कर सकता है. विवाह ज्योतिष के द्वारा...

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शादी विवाह जीवन का वह पड़ाव है जहां से जीवन का अलग ही रंग दिखाई देने लगता है. शादी विवाह को लेकर हम सभी लोग काफी भागदौड़ भी करते हैं एक अच्छे रिश्ते की तलाश सभी को रहती है. ऎसे में विवाह ज्योतिष इस में हमारी बहुत मदद कर सकता है. विवाह ज्योतिष के द्वारा पता लगाया जा सकता है की शादी के लिए सबसे अच्छा समय कब होगा और कब हम अपने सोलमेट को पाने में सफल होंगे

 

किसी व्यक्ति की शादी कब होगी यह कोई ऐसी स्थिति नहीं जिसे हम सही से नहीं जान सकते हैं हमें बस आवश्यकता होती है एक सही मार्गदर्शन की जिसे अधिकांश लोग ले नहीं पाते हैं. शादी से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर आपकी ही जन्म कुंडली में छुपा होता है, इसी कारण से इसके लिए विवाह ज्योतिष की भूमिका को गहनता से जान लेना बहुत जरूरी है और साथ ही एक योग्य ज्योतिषी की मदद लेना भी बहुत आवश्यक होता है

 

कुंडली के उचित विश्लेषण से ही आप अपनी शादी का निर्णय नहीं ले सकते हैं. आपके लिए जरूरी है कि आप अपनी कुंडली को अच्छे से जानें. आपकी कुंडली का हर भाव आपके विवाह के सुख को दिखाने वाला होता है. वहीं इनमें से कुछ भाव ऎसे हैं जो आपके विवाह के समय को बताने वाले होते हैं. तो चलिये आइये जान लेते हैं वह कुछ बातें जो बताती हैं कि आखिर शादी कब हो सकती है, विवाह में दिक्कत, देरी, परेशानी जैसी बातों के कारण क्या हैं :-

 

शादी में देरी के क्या कारण हैं?

 

कई बार रिश्ते की खोज में लगातार मिलने वाली निराशा इतना परेशान कर देती है कि यह सब बहुत ही थका देने वाला और निराशाजनक भी बन जाता है. ऐसे में मन में प्रश्न उठ सकता है कि आखिर शादी में देरी के क्या कारण हैं?, तो इस बात को आपकी कुंडली स्पष्ट रूप से बताती है. कुंडली में सातवां भाव विवाह का घर कहलाता है. जीवन साथी कैसा होगा इसकी जानकारी के लिए सप्तम भाव का सूक्ष्म विश्लेषण बहुत जरुरी होता है. सप्तम भाव का स्वामी, सप्तम भाव के स्वामी पर अन्य ग्रहों का प्रभाव. सातवें भाव पर ग्रहों की दृष्टि, सातवें भाव का स्वामी कुंडली में कहां बैठा हुआ है और वर्ग कुंडली में उसका क्या हाल है. यह बातें जान कर विवाह में देरी का कारण पता लगाया जाता है

 

उदाहरण के लिए अगर कुंडली में सातवें भाव का स्वामी आठवें भाव में बैठ जाए, बारहवें भाव छठे भाव या दूसरे भाव में चला जाए. इसी के साथ अष्टम भाव का स्वामी सप्तम भाव के साथ राशि परिवर्तन कर ले या फिर सप्तम भाव में ही बैठ जाए, या फिर शनि ग्रह सातवें भाव को देखता हो या उसमें विराजमान है तो ऎसे कुछ कारण विवाह में देरी के लिए जिम्मेदार होते हैं. इसी तरह नवम भाव की स्थिति भी देखी जाती है.

 

देर से विवाह के लिए कौन सा ग्रह जिम्मेदार है?

 

विवाह में देरी तो हो रही है जिसे हमने भाव से समझा लेकिन अब बात आती है की आखिर वे कौन से ग्रह हैं जोदेर से विवाह के लिए कौन सा ग्रह जिम्मेदार है?” तो ऐसे में सामान्य रूप सातवें भाव के स्वामी, पाप ग्रहों अथवा क्रूर ग्रहों की भूमिका को अधिक देखा जाता है. अब जब बात आती है इन ग्रहों की कौन है पाप ग्रह और कौन हैं क्रूर ग्रह तो विशेष रूप से शनि, राहु, केतु, मंगल और सूर्य जैसे ग्रहों का नाम इसमें आता है

 

अब यहां यह भी समझना जरूरी है कि पाप ग्रह से अर्थ यह नहीं की ये खराब ग्रह हैं बल्कि इनके भीतर जो एक उग्रता या निरसता का गुण होता है वहीं विवाह में देरी के लिए जिम्मेदार बन जाता है, लेकिन इसके अलावा कई बार शुभ ग्रह भी विवाह में देरी/Late Marriage दे जाते हैं इसलिए इस स्थिति में जरूरी है की उचित रूप से कुंडली अनुसार ये देखा जाए की आपकी कुंडली में कौन सा ग्रह विशेष रूप से देर से विवाह के लिए जिम्मेदार बन रहा है.

 

कुंडली में विवाह के योग कब बनते हैं?

 

अब बात आती है कुंडली में विवाह के योग कब बनते हैं? तो इस के लिए कुंडली के बल को देखना जरूरी है, कुंडली में विवाह भाव, विवाह भाव का स्वामी कितना उत्तम है. शुभ ग्रहों का प्रभाव सप्तम भाव को किस तरह से मजबूती दे पा रहा है. अन्य वर्ग चार्ट जैसे कि नवांश कुंडली में ग्रहों की स्थिति सप्तम भाव और लग्न के साथ उसकी स्थिति या लग्न का स्वामी नवांश में कैसे बैठा हुआ है, वर्तमान में चल रही दशा और ग्रहों के गोचर का असर ये सब बातें बताती हैं की आपका विवाह कब होगा. कुंडली/kundli में लग्न, द्वितीय भाव, पंचम भाव, सप्तम भाव, नवम भावों की दशाएं गोचर जैसी स्थितियां विवाह के होने का संकेत देने वाली होती है. कुंडली में आपके जन्म चंद्रमा की स्थिति के साथ दशा गोचर और योग को देखते हुए आपके विवाह होने की भविष्यवाणी की जाती है

 

इन कुछ ज्योतिषीय सूत्रों को ध्यान में रख कर अगर हम रिश्तों को जोड़ते हैं. विवाह जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेते हैं तब हम सही अर्थों में शादी का सुख भी पाते हैं, इसलिए एक योग्य ज्योतिषी का मार्गदर्शन लेना अत्यंत आवश्यक होता है जो आपको सही जानकारी दे साथ में जो योग निर्बल बन रहे हैं उन्हें मजबूत करने के विशेष उपाय बताए जिससे आप उस सुख को पाएं जिस पर आपका अधिकार है.

 

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