puja muhurat Archives - KundliHindi https://kundlihindi.com/tag/puja-muhurat/ My WordPress Blog Wed, 08 Oct 2025 06:54:05 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://i0.wp.com/kundlihindi.com/wp-content/uploads/2022/11/cropped-kundlihindi.png?fit=32%2C32&ssl=1 puja muhurat Archives - KundliHindi https://kundlihindi.com/tag/puja-muhurat/ 32 32 214685846 AHOI ASHTAMI 2025 – परिचय एवं महत्व https://kundlihindi.com/blog/ahoi-ashtami-2025/ https://kundlihindi.com/blog/ahoi-ashtami-2025/#respond Wed, 08 Oct 2025 06:53:22 +0000 https://kundlihindi.com/?p=4107 अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami / Ahoi Aathe) एक पवित्र हिंदू व्रत है जो मुख्यतः माताएँ अपने बच्चों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य, और सफलता की कामना करते हुए करती हैं। यह व्रत कार्तिक की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। परंपरागत रूप से यह व्रत उन स्त्रियों द्वारा रखा जाता रहा है जो संतान की कामना करती हों, या जो...

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अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami / Ahoi Aathe) एक पवित्र हिंदू व्रत है जो मुख्यतः माताएँ अपने बच्चों की लंबी उम्रस्वास्थ्य, और सफलता की कामना करते हुए करती हैं। यह व्रत कार्तिक की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।

परंपरागत रूप से यह व्रत उन स्त्रियों द्वारा रखा जाता रहा है जो संतान की कामना करती हों, या जो अपने बच्चों की सुरक्षाकल्याण के लिए देवी से प्रार्थना करना चाहती हों। आज के समय में यह व्रत सभी माताएँ बिना भेदभाव (मोटे तौर पर पुत्र और पुत्री दोनों के लिए) करती हैं।

नाम का अर्थ: “अहोईशब्द “Aho” (उपवास दिन) + “Ashtami” (आठवाँ दिन) से मिलता है, जिससे यह व्रत उस अष्टमी तिथि को निरूपित करता है। 

2025 में अहोई अष्टमी कब है? (Date & Time)

·  वर्ष 2025 में अहोई अष्टमी 13 अक्टूबर, सोमवार को होगी। 

·  अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी: 13 अक्टूबर, दोपहर लगभग 12:24 बजे।

·  अष्टमी तिथि समाप्त होगी: 14 अक्टूबर की सुबह लगभग 11:10 बजे तक। 

·  पूजा मुहूर्त (शुभ समय): लगभग शाम 05:53 बजे से 07:08 बजे तक (लगभग 1 घंटा 15 मिनट

·  तारों का दर्शन (संज्ञक समय): लगभग 06:17 बजे या 06:28 बजे के आसपास 

·  चंद्र उदय (Moonrise): लगभग देर रात 11:20 बजे या करीब उसी समय 

ध्यान दें: ये समय स्थानीय पंचांग पर निर्भर करेंगे। आपके स्थान (जैसे आपके शहर, समय क्षेत्र) के अनुसार ये समय थोड़े बहुत भिन्न हो सकते हैं।

पूजाविधि और व्रत की प्रक्रिया (How to Do Puja & Vrat)

नीचे Dr Vinay Bajrangi की सलाह के आधार पर (मान लीजिए उनका मानना है कि शुद्ध नीयत और विधिपूर्वक पूजा सर्वोपरि है) एक सरल, लेकिन प्रभावशाली विधि दी गई है:

पूर्व तैयारी

1.    सफाई और पवित्रता
व्रत से एक दिन पहले या सुबह जल्दी घर और पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें।

2.    संकल्प (Sankalp)
सुबह स्नान के बाद, पूजा स्थान पर स्थिर होकर मन, वचन और क्रिया से प्रण लें कि आप आज यह व्रत बच्चों की सुरक्षा, दीर्घ जीवन एवं सुखसमृद्धि हेतु कर रही हैं।

3.    अलपना / रंगोली
पूजा स्थान के पास हल्की अलपना या हलका सजावट करें।

4.    माता अहोई का चित्र / रूपांकन
दीवार पर अष्टकोण (8 कोने) वाला चित्र बनाएं जिसमें अहोई माता का चित्र हो तथा पास में एक सिंहनी शिशु (कुँवारा) या हेजहॉग (साही / साहीने) का चित्र हो। यदि चित्र बना सकें, तो प्रिंट या तैयार चित्र का उपयोग करें। 

व्रत (पूजापूर्व)

·  सुबह से निराहार व्रत (निरजल व्रतबिना जल के) रखें। कुछ परंपराओं में पानी लिया जा सकता है, लेकिन पारंपरिक मान्यताओं में पूरी तरह निर्जल व्रत श्रेष्ठ माना जाता है। 

·  दिन भर सत्संग, पूजा कथा सुनना या पढ़ना, ध्यान करना लाभदायक है।

संध्या समय (शाम) पूजा

1.    दीप, धूप, पुष्प
एक दीपक जलाएं, धूप (अगरबत्ती) करें और माता को सुगंधित पुष्प अर्पित करें।

2.    नैवेद्य अर्पण
फल, मिठाइयाँ, हलवा, पूरी, अन्य शुद्ध भोजन (सात्विक) माता को भोग लगाएं।

3.    व्रत कथा पढ़ना / सुनना
अहोई अष्टमी की कथा व्रतकथा पढ़ें और उसकी शिक्षाएँ आत्मसात करें। 

4.    तारों / चंद्र दर्शन एवं अर्घ्य
जब आकाश में तारे दिखाई दें, उन्हें जल (पवित्र जल) से अर्घ्य दें। कुछ लोकाचारों में चंद्र दर्शन होने पर चाँद को अर्घ्य देते हुए व्रत खोलते हैं। 

5.    पारण (व्रत खोलना)
व्रत अंत में माता को प्रसाद चढ़ाने के बाद (और तारा/चंद्र दर्शन के बाद) आप पुत्र या परिवार वालों द्वारा पहला जल ग्रहण करें, उसके बाद अपना व्रत खोलें।

विशेष उपायनिःसंतान स्त्रियों के लिए

निःसंतान स्त्रियों के लिए यह व्रत विशेष महत्व रखता है। कहा जाता है कि यदि वे श्रद्धा, शुद्ध मन, पूर्ण विधि और समर्पण के साथ यह व्रत करें, तो उन्हें संतान की प्राप्ति की कृपा हो सकती है। 

इसके अतिरिक्तRadha Kunda (मथुरा) में स्नान करना या पूजा करना काफी शुभ माना जाता है, विशेषकर वे महिलाएँ जो संतान की कामना करती हों। 

Dr Vinay Bajrangi का दृष्टिकोण यह हो सकता है कि संतान प्राप्ति हेतु मन, श्रद्धा और समर्पण सबसे महत्वपूर्ण हैंपूजा सामग्री या बाह्य कर्मों की तुलना में आन्तरिक निष्ठा अधिक फलदायी होती है।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण और फल

·  इस व्रत का समय कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में आता है, जो अष्टमी तिथि की ऊर्जा से जुड़ा हैयह तिथि संकल्प, स्थिरता और आध्यात्मिक बल का सूचक है।

·  यदि व्रत पूरी श्रद्धा और नियम से किया जाए, तो कहा जाता है कि दुःसाध्य रोग, भय, रुकावटें दूर होती हैं और बच्चों का जीवन सुरक्षित दीर्घायु बनता है।

·  जिन जोड़ों को संतान की समस्या है, वे इस व्रत को मनोबल और आत्मविश्वास के साथ करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त कर सकती हैं। लेकिन ध्यान रहेयह एक धार्मिक विश्वास है, कि किसी चिकित्सीय दावा।

·  ग्रहों की स्थिति जैसे चंद्र, शुक्र, बृहस्पति आदि भी प्रभाव डाल सकते हैंयदि व्रत के समय ग्रहस्थिति अनुकूल हो, तो व्रत की efficacy बढ़ सकती है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. क्या यह व्रत सिर्फ स्त्रियों के लिए है?
A.
परंपरागत रूप से माँ (स्त्रियाँ) व्रत करती थीं, लेकिन आज यह व्रत पुरुषों या अन्य परिवार के सदस्य भी पूजासमारोह में शामिल हो सकते हैं, विशेषकर यदि वे अपनी संतति या बच्चों की रक्षा की कामना करें।

Q2. क्या पानी पीना या फल खाना व्रत को तोड़ देगा?
A.
यदि परंपरा के अनुसार निरझल व्रत रखा गया है, तो पानी या भोजन करना व्रत को तोड़ माना जाता है। लेकिन यदि किसी स्वास्थ्य कारण से पानी लेना अनिवार्य हो, तो हल्का पानी जैसे ताजे फलजलबिना स्वाद और शक्कर केभगवान की अनुमति से ग्रहण किया जा सकता है।

Q3. मैं निःसंतान हूँक्या यह व्रत मेरे लिए सुरक्षित है?
A.
हाँ, यह व्रत उन स्त्रियों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक है जो संतान की कामना करती हैं। परंतु, यदि स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो (जैसे रक्तचाप, मधुमेह आदि), तो व्रत करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य करना चाहिए।

Q4. यदि मैं व्रत नहीं रख पाऊँ, तो क्या पूजा कर सकती हूँ?
A.
हाँ। यदि किसी कारण वश पूरा व्रत हो सके, तो कमसेकम पूजा करते हुए माता अहोई को श्रद्धा सहित अर्घ्य, मौन ध्यान, कथा पाठ आदि कर सकती हैं।

Q5. व्रत खोलने का सर्वोत्तम समय कौनसा है?
A.
व्रत समय तब खोला जाता है जब तारे दिखाई दें और उन्हें अर्घ्य दिया जाए। यदि चंद्र दर्शन हो, तो चंद्र को अर्घ्य देकर व्रत खोलना शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

AHOI ASHTAMI 2025 एक अद्भुत अवसर है जब माताएँ भक्तिश्रद्धा, और पवित्र निष्ठा के साथ अपने बच्चों की रक्षा एवं समृद्धि की कामना करती हैं। इस व्रत को नियमित विधिपूजाकथा, और श्रृद्दालु भाव से करने से माना जाता है कि देवी अहोई माता अपनी कृपा बनाती हैं।

Dr Vinay Bajrangi की सलाह यह होगी कि:

व्रत का सही मूल (मूलमंत्र) हैसच्चा विश्वास, आस्था, संयम और प्रेम। पूजा सामग्री और बाहरी क्रियाएँ महत्त्वपूर्ण हैं, लेकिन उनका असली फल मन की शुद्धता और श्रद्धा से आता है।

यदि आप चाहें तो मैं आपके शहर के स्थानीय शुभ मुहूर्त बताने में मदद कर सकती हूँ, ताकि आप समयानुसार व्रत और पूजा कर सकें। क्या मैं आपके शहर (जैसे आप कहाँ हैं) के लिए मुहूर्त भेजूं?

किसी भी विशिष्ट मुद्दे के लिए, मेरे कार्यालय @ +91 9999113366 से संपर्क करें। भगवान आपको एक खुशहाल जीवन आनंद प्रदान करें।

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Dussehra 2025: विजयदशमी कब है? तारीख, समय और महत्व जानें https://kundlihindi.com/blog/dussehra-2025/ https://kundlihindi.com/blog/dussehra-2025/#respond Wed, 24 Sep 2025 09:06:45 +0000 https://kundlihindi.com/?p=4056 दशहरा या विजयदशमी हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन मास की शुक्ल पक्ष दसमी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में दशहरा 2 अक्टूबर, 2025 (गुरुवार) को है। महत्वपूर्ण समय (मुहूर्त): विजय मुहूर्त: 02:09 PM से 02:56 PM (लगभग 47 मिनट) अपराह्न पूजा समय: 01:21 PM से 03:44 PM (लगभग 2 घंटे 22 मिनट) दशमी तिथि...

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दशहरा या विजयदशमी हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन मास की शुक्ल पक्ष दसमी तिथि को मनाया जाता है।

2025 में दशहरा 2 अक्टूबर, 2025 (गुरुवार) को है।

महत्वपूर्ण समय (मुहूर्त):

विजय मुहूर्त: 02:09 PM से 02:56 PM (लगभग 47 मिनट)

अपराह्न पूजा समय: 01:21 PM से 03:44 PM (लगभग 2 घंटे 22 मिनट)

दशमी तिथि प्रारंभ: 01 अक्टूबर, शाम 7:01 बजे से

दशमी तिथि समाप्त: 02 अक्टूबर, शाम 7:10 बजे तक

इस प्रकार, दशमी तिथि एवं मुहूर्त दोनों को ध्यान में रखते हुए पूजाअर्चना करनी चाहिए।

ज्योतिषीय महत्व एवं Dr Vinay Bajrangi की दृष्टि


1.
बुराई पर अच्छाई की जीत

Dussehra 2025 यह संदेश देता है कि अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई की विजय होती है। यह सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी एक परिवर्तनकारी समय है।

2. उपाय एवं मुहूर्त का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में कहा जाता है कि यदि पूजा एवं मंत्रोच्चारण सही मुहूर्त पर किया जाए, तो उसका प्रभाव अनेक गुना बढ़ जाता है। यह शुभ ग्रहयोग और नक्षत्र स्थिति से जुड़ा है।

3. Dr Vinay Bajrangi का विश्लेषण

Dr Vinay Bajrangi एक प्रसिद्ध वैदिक ज्योतिषी हैं, जिन्होंने दशहरा जैसे त्योहारों का गहरा ज्योतिषीय विश्लेषण प्रस्तुत किया है।

उनके अनुसार:

विजयदशमी के दिन शामी पूजा, अपराजिता पूजा एवं सीमा अवलांगन (Seema Avalanghan) जैसे उपाय विशेष रूप से लाभदायक होते हैं।

दशमी तिथि की शुरुआत एवं अंत का समय ग्रहनक्षत्रों के अनुसार देखा जाना चाहिए ताकि पूजा का प्रभाव अधिकतम हो।

वे यह सुझाव देते हैं कि केवल रीतिगत पूजा से काम नहीं चलेगा, कर्म सिद्धि, आत्मिक प्रयत्न और सच्ची भक्ति आवश्यक है।

Dr Bajrangi इस बात पर जोर देते हैं कि जब किसी व्यक्ति की जन्मपत्री (कुंडली), नवांश (D-9 चार्ट) और ग्रह दशा को मिलाकर देखा जाए, तब ही सही उपाय सुझाए जा सकते हैं।

दशहरा 2025: क्या करें, क्या करें

शुभ दिशाएँ एवं उपाय

शमी (Vachellia / Prosopis) पत्तों का आदानप्रदान करनायह पारम्परिक रूप से विजय का प्रतीक माना जाता है।

दिन के समय रावण दहन समारोह देखना या आयोजन करनाबुराई का विनाश।

अपराजिता देवी की पूजा करनाशक्ति और अजेयता की देवी मंत्रों के साथ।

सीमा अवलांगनप्रतीकात्मक सीमाओं को पार करना, नये आरंभों की ओर बढ़ना।

1. शुभ मुहूर्त में विशेष पूजा करना, ध्यान करना।

2. दान, सेवा और दूसरों की सहायता करना।

किन बातों से बचें

1. पूजा या योजना को संदेह या व्याकुलता की मानसिकता से करना

2. अनौपचारिक समय में पूजा करना, बिना मुहूर्त देखे

3. नकारात्मक विचार, द्वेष या अहंकार को मुखर करना

FAQs (
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1: विजयदशमी और दशहरा में क्या अंतर है?
उत्तर: दोनों ही एक ही त्योहार के रूप में उपयोग होते हैं। दशहरा शब्द भक्तिपरक नाम है, जबकि विजयदशमी इसका संस्कृत नाम है।

Q2: क्या हर क्षेत्र में पूजा समय (मुहूर्त) एक जैसा होगा?
उत्तर: नहीं। मुहूर्त क्षेत्र (स्थान), अक्षांशदेशांतर, ग्रहनक्षत्र स्थिति आदि से प्रभावित होता है। इसलिए प्रत्येक क्षेत्र का पंचांग देखना आवश्यक है।

Q3: यदि विजय मुहूर्त छूट जाए तो क्या पूजा बेकार होती है?
उत्तर: नहीं। सही नकारात्मक नहीं कह सकते, लेकिन शुभ मुहूर्त में करने का प्रभाव अधिक माना जाता है। बाद में भी पूजा कर सकते हैं।

Q4: Dr Vinay Bajrangi से कैसे संपर्क करें?
उत्तर: Dr Vinay Bajrangi की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म हैं, जहाँ ज्योतिषी सेवा एवं मार्गदर्शन मिलता है।

Q5: दशहरा के बाद किस त्योहार की तैयारी शुरू होती है?
उत्तर: दशहरा के बाद दीपावली (Diwali) की तैयारी शुरू होती हैदीपों, पूजा सामग्री, सफाई आदि।

निष्कर्ष

Dussehra 2025 का यह पर्व 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा, और इसका विजय मुहूर्त 02:09 PM से 02:56 PM है। यह समय बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। Dr Vinay Bajrangi जैसे ज्योतिषी इस पर्व को सिर्फ आध्यात्मिक रूप से, बल्कि ग्रहनक्षत्र प्रभावों के दृष्टिकोण से भी देखते हैं।

इस विजयदशमी पर, शुभ मुहूर्त में निरंतर पूजा, सच्ची भक्ति, आत्मपरीक्षण और दानउपकार को अपनाएँ। यदि आप चाहें तो मैं आपके जन्मपत्री अनुसार इस दशहरा के लिए विशेष उपाय और मुहूर्त भी बता सकता हूँक्या मैं आपके लिए ये कर दूँ?

Dr. Vinay Bajrangi: किसी भी विशिष्ट मुद्दे के लिए, मेरे कार्यालय @ +91 9999113366 से संपर्क करें। भगवान आपको एक खुशहाल जीवन आनंद प्रदान करें।

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