Dussehra Archives - KundliHindi https://kundlihindi.com/tag/dussehra/ My WordPress Blog Wed, 24 Sep 2025 09:12:18 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://i0.wp.com/kundlihindi.com/wp-content/uploads/2022/11/cropped-kundlihindi.png?fit=32%2C32&ssl=1 Dussehra Archives - KundliHindi https://kundlihindi.com/tag/dussehra/ 32 32 214685846 Dussehra 2025: विजयदशमी कब है? तारीख, समय और महत्व जानें https://kundlihindi.com/blog/dussehra-2025/ https://kundlihindi.com/blog/dussehra-2025/#respond Wed, 24 Sep 2025 09:06:45 +0000 https://kundlihindi.com/?p=4056 दशहरा या विजयदशमी हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन मास की शुक्ल पक्ष दसमी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में दशहरा 2 अक्टूबर, 2025 (गुरुवार) को है। महत्वपूर्ण समय (मुहूर्त): विजय मुहूर्त: 02:09 PM से 02:56 PM (लगभग 47 मिनट) अपराह्न पूजा समय: 01:21 PM से 03:44 PM (लगभग 2 घंटे 22 मिनट) दशमी तिथि...

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दशहरा या विजयदशमी हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन मास की शुक्ल पक्ष दसमी तिथि को मनाया जाता है।

2025 में दशहरा 2 अक्टूबर, 2025 (गुरुवार) को है।

महत्वपूर्ण समय (मुहूर्त):

विजय मुहूर्त: 02:09 PM से 02:56 PM (लगभग 47 मिनट)

अपराह्न पूजा समय: 01:21 PM से 03:44 PM (लगभग 2 घंटे 22 मिनट)

दशमी तिथि प्रारंभ: 01 अक्टूबर, शाम 7:01 बजे से

दशमी तिथि समाप्त: 02 अक्टूबर, शाम 7:10 बजे तक

इस प्रकार, दशमी तिथि एवं मुहूर्त दोनों को ध्यान में रखते हुए पूजाअर्चना करनी चाहिए।

ज्योतिषीय महत्व एवं Dr Vinay Bajrangi की दृष्टि


1.
बुराई पर अच्छाई की जीत

Dussehra 2025 यह संदेश देता है कि अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई की विजय होती है। यह सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी एक परिवर्तनकारी समय है।

2. उपाय एवं मुहूर्त का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में कहा जाता है कि यदि पूजा एवं मंत्रोच्चारण सही मुहूर्त पर किया जाए, तो उसका प्रभाव अनेक गुना बढ़ जाता है। यह शुभ ग्रहयोग और नक्षत्र स्थिति से जुड़ा है।

3. Dr Vinay Bajrangi का विश्लेषण

Dr Vinay Bajrangi एक प्रसिद्ध वैदिक ज्योतिषी हैं, जिन्होंने दशहरा जैसे त्योहारों का गहरा ज्योतिषीय विश्लेषण प्रस्तुत किया है।

उनके अनुसार:

विजयदशमी के दिन शामी पूजा, अपराजिता पूजा एवं सीमा अवलांगन (Seema Avalanghan) जैसे उपाय विशेष रूप से लाभदायक होते हैं।

दशमी तिथि की शुरुआत एवं अंत का समय ग्रहनक्षत्रों के अनुसार देखा जाना चाहिए ताकि पूजा का प्रभाव अधिकतम हो।

वे यह सुझाव देते हैं कि केवल रीतिगत पूजा से काम नहीं चलेगा, कर्म सिद्धि, आत्मिक प्रयत्न और सच्ची भक्ति आवश्यक है।

Dr Bajrangi इस बात पर जोर देते हैं कि जब किसी व्यक्ति की जन्मपत्री (कुंडली), नवांश (D-9 चार्ट) और ग्रह दशा को मिलाकर देखा जाए, तब ही सही उपाय सुझाए जा सकते हैं।

दशहरा 2025: क्या करें, क्या करें

शुभ दिशाएँ एवं उपाय

शमी (Vachellia / Prosopis) पत्तों का आदानप्रदान करनायह पारम्परिक रूप से विजय का प्रतीक माना जाता है।

दिन के समय रावण दहन समारोह देखना या आयोजन करनाबुराई का विनाश।

अपराजिता देवी की पूजा करनाशक्ति और अजेयता की देवी मंत्रों के साथ।

सीमा अवलांगनप्रतीकात्मक सीमाओं को पार करना, नये आरंभों की ओर बढ़ना।

1. शुभ मुहूर्त में विशेष पूजा करना, ध्यान करना।

2. दान, सेवा और दूसरों की सहायता करना।

किन बातों से बचें

1. पूजा या योजना को संदेह या व्याकुलता की मानसिकता से करना

2. अनौपचारिक समय में पूजा करना, बिना मुहूर्त देखे

3. नकारात्मक विचार, द्वेष या अहंकार को मुखर करना

FAQs (
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1: विजयदशमी और दशहरा में क्या अंतर है?
उत्तर: दोनों ही एक ही त्योहार के रूप में उपयोग होते हैं। दशहरा शब्द भक्तिपरक नाम है, जबकि विजयदशमी इसका संस्कृत नाम है।

Q2: क्या हर क्षेत्र में पूजा समय (मुहूर्त) एक जैसा होगा?
उत्तर: नहीं। मुहूर्त क्षेत्र (स्थान), अक्षांशदेशांतर, ग्रहनक्षत्र स्थिति आदि से प्रभावित होता है। इसलिए प्रत्येक क्षेत्र का पंचांग देखना आवश्यक है।

Q3: यदि विजय मुहूर्त छूट जाए तो क्या पूजा बेकार होती है?
उत्तर: नहीं। सही नकारात्मक नहीं कह सकते, लेकिन शुभ मुहूर्त में करने का प्रभाव अधिक माना जाता है। बाद में भी पूजा कर सकते हैं।

Q4: Dr Vinay Bajrangi से कैसे संपर्क करें?
उत्तर: Dr Vinay Bajrangi की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म हैं, जहाँ ज्योतिषी सेवा एवं मार्गदर्शन मिलता है।

Q5: दशहरा के बाद किस त्योहार की तैयारी शुरू होती है?
उत्तर: दशहरा के बाद दीपावली (Diwali) की तैयारी शुरू होती हैदीपों, पूजा सामग्री, सफाई आदि।

निष्कर्ष

Dussehra 2025 का यह पर्व 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा, और इसका विजय मुहूर्त 02:09 PM से 02:56 PM है। यह समय बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। Dr Vinay Bajrangi जैसे ज्योतिषी इस पर्व को सिर्फ आध्यात्मिक रूप से, बल्कि ग्रहनक्षत्र प्रभावों के दृष्टिकोण से भी देखते हैं।

इस विजयदशमी पर, शुभ मुहूर्त में निरंतर पूजा, सच्ची भक्ति, आत्मपरीक्षण और दानउपकार को अपनाएँ। यदि आप चाहें तो मैं आपके जन्मपत्री अनुसार इस दशहरा के लिए विशेष उपाय और मुहूर्त भी बता सकता हूँक्या मैं आपके लिए ये कर दूँ?

Dr. Vinay Bajrangi: किसी भी विशिष्ट मुद्दे के लिए, मेरे कार्यालय @ +91 9999113366 से संपर्क करें। भगवान आपको एक खुशहाल जीवन आनंद प्रदान करें।

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गंगा दशहरा 2024 शुभ मुहूर्त https://kundlihindi.com/blog/ganga-dussehra/ https://kundlihindi.com/blog/ganga-dussehra/#respond Tue, 11 Jun 2024 05:42:31 +0000 https://kundlihindi.com/?p=2666 गंगा दशहरा ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन आने वाला विशेष पर्व है. यह त्यौहार संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है. देवी गंगा के अवतरण से संबंधित यह दिन भक्तों के लिए जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला समय होता है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया जाने वाला...

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गंगा दशहरा ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन आने वाला विशेष पर्व है. यह त्यौहार संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है. देवी गंगा के अवतरण से संबंधित यह दिन भक्तों के लिए जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला समय होता है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया जाने वाला माँ गंगा का पूजन व्यक्ति कर्मों को सुधारने का भी विशिष्ट समय होता है. अत: इस दिन कर्म सुधार के नियमों को अपनाते हुए जीवन को कष्टों से मुक्त कर पाने में सहायता मिलती है.

कैसे होता गंगा दशहरा में कर्म सुधार उपाय

” गंगां वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतं ।
त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु मां ।। ”

गंगा की उत्पत्ति की गाथा ही कर्म एवं पूर्व में किए गए कर्मों के सुधार की रही है. गंगा दशहरा देवी गंगा के पृथ्वी पर आगमन की विशेष घटना है. जिसका वर्णन “हरिवंश पुराण”, “विष्णु पुराण”, भागवत, “ब्रह्मवैवर्त पुराण” “रामायण” इत्यादि ग्रंथों में प्राप्त होता है.

गंगा के पृथ्वी में आगमन की कथा अनुसार इक्ष्वाकु वंश में जन्मे भगीरथ द्वारा ही वह पृथ्वी लोक में आती हैं.  सम्राट दिलीप के पुत्र राजा भगीरथ ने अपने पितरों के कर्मों की शुद्धि एवं मुक्ति के लिए ही कठोर तप किया और देवी गंगा को प्राप्त किया. कुछ कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ को जब अपने पूर्वजों के श्राप का बोध होता है जो कपिल मुनि के शाप से भस्म हुए थे जो राजा सगर के 60 हजार पुत्र थे. राजा सगर के पुत्रों ने कपिल मुनि का अपमान किया जिसके चलते उन्हें अपने कर्मों के फल अनुसार मृत्यु प्राप्त होती है और ऎसे मृत्यु जो मुक्ति नहीं देती अत: जिसके चलते पितृ दोष एवं कर्म अशुद्धि का दोष आने वाले लोगों को प्राप्त होता है.

गंगा दशहरा का शुभ मुहूर्त

पूजा शुभ मुहूर्त– सुबह 7:08 मिनट-सुबह 10:37 मिनट तक

दशमी तिथि प्रारम्भ – जून 16, 2024 को 02:32 am

दशमी तिथि समाप्त – जून 17, 2024 को 04:43 am

हस्त नक्षत्र प्रारम्भ – जून 15, 2024 को 08:14 am

हस्त नक्षत्र समाप्त – जून 16, 2024 को 11:13 am

व्यतीपात योग प्रारम्भ – जून 14, 2024 को 07:08 pm

व्यतीपात योग समाप्त – जून 15, 2024 को 08:11 pm

जानिए आज का त्योहार तारीख, समय के साथ।

गंगा दशहरा पूर्वजों के कर्मों की शुद्धि एवं कुल वृद्धि का समय

भगीरथ अपने कुल के कर्मों के उद्धार के लिए अपने पूर्वजों को श्राप से मुक्ति दिलाने हेतु कठोर साधना की. देवी गंगा को पृथ्वी पर लाने हेतु वह ब्रह्मा जी का पूजन करते हैं. ब्रह्मा जी भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मांगने को कहते हैं

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तब भागीरथ जी अपने पूर्वजों की मुक्ति उनके कर्मों की शुद्धि व संतान की प्राप्ति का वरदान मांगते हैं. तब ब्रह्मा जी उन्हें वरदान स्वरुप गंगा प्रदान करते हैं किंतु गंगा का वेग इतना प्रबल होता है की उसे कोई संभाल नहीं पाता है तब भागीरथ भगवान शिव की उपासना करते हैं और भगवान उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा को अपनी जटाओं में स्थान देकर उन्हें पृथ्वी की ओर प्रवाहित करते हैं. इस तरह देवी गंगा पृथ्वी पर आकर भगीरथ के कुल का उद्धार करती हैं. देवी का आगम न केवल उनके उद्धार हेतु हुआ अपितु समस्त पृथ्वी का उद्धार भी संभव हो पाया. इसलिए गंगा दशहरा के समय किया जाने वाला गंगा पूजन व्यक्ति के कर्मों का सुधार करने का विशेष दिन बन जाता है.

पूर्व जन्म के कर्मों का ज्योतिषीय अध्ययन और विश्लेषण

गंगा दशहरा के दिन दस पाप होते हैं क्षय

वाराह पुराण के कथन अनुसार   ” हरते दशपापानि तस्माद्दशहरा समृता ।।”
गंगा दशहरा के संदर्भ में पुराणों की उक्ति का एक उल्लेख यह बताता है की दशहरा/Dussehra के दिन व्यक्ति दश पापों को हरने वाली है. अत: इस दिन व्यक्ति के कर्म में हुए जाने अनजाने कार्यों से उत्पन्न पाओं का हरण भी इस दिन संभव होता है.

एक अन्य कथन के अनुसार यदि ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि हो, हस्त नक्षत्र का समय हो तब यह समय उत्तम योगों का माना गया है. माना गया है की हस्त नक्षत्र की उपस्थिति में ही गंगा माता पृथ्वी की ओर उन्मुख हुई थी और माँ गंगा का अवतरण इस शुभ नक्षत्र समय हुआ. इसी कारण इन शुभ योगों के संयोग की प्राप्ति होने पर भी यह दिन व्यक्ति के समस्त बुरे प्रभावों को समाप्त कर देने में सहायक होता है.

जीवन में व्यक्ति अनेक प्रकार के कार्यों को करते हैं और कई बार ऐसे कार्य भी कर बैठता है जो उससे अंजाने में हो जाते हैं. विष्णु पुराण के अनुसार हमारे कर्म भी कई तरह से संभव होते हैं मनसा वचना और कर्मा, इसमें से 4 वाचिक कर्म हैं 3 कायिक कर्म एवं 3 मानसिक कर्म भी हैं अत: इन सभी के द्वारा यदि कोई कार्य गलत होता है तो उन सभी पापों का शमन गंगा दशहरा के पूजन एवं अनुष्ठान द्वारा संभव होता है.

गंगा दशहरा से दूर होती हैं काम काज या अन्य प्रकार की समस्त बाधाएं

गंगा दशहरा वह शुभ दिन है जो व्यक्ति के जीवन की बाधाओं को समाप्त करता है. यह कारोबार में तरक्की पाने का समय होता है, यह आपके जीवन में आ रही हर प्रकार की कानूनी बाधा को भी दूर करने वाला समय होता है. किसी प्रकार की गलत आदत हो या व्यक्ति किसी प्रकार के नशे या लत से पीड़ित हो तो इस दौरान किया गया अनुष्ठान एवं पूजन व्यक्ति के इन सभी दुष्प्रभावों को मुक्त करने में सहायक बनता है. यह बिलकुल वैसे ही सहायक होता है जैसे गंगा का भागीरथी और  जाह्नवी बनकर बहना पृथ्वी क्योंकि जिसने जैसा प्रयास किया गंगा उस रूप में प्रवाहित और प्रचलित हुईं इसलिए गंगा दशहरा का समय हर प्रकार के कष्ट से मुक्ति का विशेष शुभ समय बन जाता है.

नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमो नम:।।

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